चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ की पावन स्मृति
यह स्थल अयोध्या के प्रतापी राजा और भगवान राम के पिता महाराज दशरथ के अंतिम विश्राम स्थल के रूप में पूजित है।
रामायण की वह मार्मिक घटना जहाँ एक पिता ने पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग दिए, यहाँ आज भी जीवंत महसूस होती है।
मुख्य शहर से दूर यह स्थान अत्यधिक शांत है, जो पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए सर्वोत्तम है।
एक ऐसा मौन स्थल जो महान रघुकुल की गाथा कहता है...
महाराज दशरथ की समाधि अयोध्या-बिल्हौर मार्ग पर स्थित है। रामायण काल के अनुसार, जब राम वनवास को गए, तब राजा दशरथ ने 'राम-राम' कहते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। उनकी अंत्येष्टि के उपरांत इसी स्थान पर इस समाधि का निर्माण किया गया था। यहाँ एक छोटा मंदिर भी है जहाँ महाराज की चरण पादुकाएं और प्रतिमा स्थित है।
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को रघुकुल की मर्यादा और त्याग की गहरी अनुभूति होती है। यहाँ का प्राचीन वृक्षों से घिरा परिवेश इसे एक तपोवन जैसा स्वरूप देता है।
प्रातः 06:00 AM से रात्रि 08:00 PM
अंधेरा होने से पूर्व यहाँ दर्शन करना अधिक सुगम रहता है।
निस्वार्थ सेवा और समर्पण के साथ हर श्रद्धालु का स्वागत।
सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान का पवित्र संगम।
सरयू तट की पावन वायु और शांत आध्यात्मिक वातावरण।