जहाँ भगवान श्री राम ने अपनी लीला का समापन किया
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने इसी स्थान से वैकुंठ की यात्रा प्रारंभ की थी।
अयोध्या के घाटों में यह सबसे शांत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने वाला स्थल है।
सरयू नदी का विस्तार और सूर्यास्त का मनोरम दृश्य यहाँ की विशेषता है।
एक ऐसा तट जहाँ इतिहास और अध्यात्म का संगम होता है...
गुप्तार घाट का नाम 'गुप्त' शब्द से आया है, जिसका अर्थ है छिपना या समाहित होना। यहाँ भगवान राम ने अपने अवतार का समापन कर जल समाधि ली थी। यहाँ की सुंदरता और पवित्रता को देखते हुए इसे अयोध्या का 'मरीन ड्राइव' भी कहा जाता है।
यहाँ भक्त स्नान कर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। घाट के किनारे बने सुंदर पार्क और प्राचीन मंदिर यहाँ के वातावरण को और भी दिव्य बना देते हैं।
प्रातः 05:00 AM से रात्रि 09:00 PM
सूर्यास्त के समय यहाँ का वातावरण अत्यंत मनमोहक हो जाता है।
निस्वार्थ सेवा और समर्पण के साथ हर श्रद्धालु का स्वागत।
सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान का पवित्र संगम।
सरयू तट की पावन वायु और शांत आध्यात्मिक वातावरण।