त्याग और तपस्या की पावन भूमि - नंदीग्राम
यहीं भरत जी ने 14 वर्षों तक तपस्वी जीवन बिताया और खड़ाऊँ को सिंहासन पर रखा।
भरत कुंड का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहाँ श्रद्धालु स्नान कर शांति पाते हैं।
अयोध्या के करीब नंदीग्राम क्षेत्र में स्थित यह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
एक ऐसा स्थान जो धर्म और विनम्रता की गाथा सुनाता है...
भरत कुंड वह स्थान है जहाँ भरत जी ने अपने बड़े भाई श्री राम के वनवास के दौरान अयोध्या के राज्य का संचालन किया। उन्होंने महल के सुखों को त्याग कर नंदीग्राम में कुटिया बनाई और नंगे पैर रहकर अपने कर्तव्य का पालन किया।
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को भरत जी के महान त्याग और समर्पण की अनुभूति होती है। झील के चारों ओर बने मंदिर और यहाँ का शांत वातावरण ध्यान के लिए सर्वोत्तम है।
प्रातः 06:00 AM से रात्रि 08:00 PM
विशेष पर्वों पर यहाँ भव्य दीपदान का आयोजन किया जाता है।
निस्वार्थ सेवा और समर्पण के साथ हर श्रद्धालु का स्वागत।
सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान का पवित्र संगम।
सरयू तट की पावन वायु और शांत आध्यात्मिक वातावरण।