अविमुक्त क्षेत्र - महादेव की नगरी और विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी
वाराणसी, जिसे काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है, महादेव की नगरी है। मान्यता है कि यह नगरी शिव के त्रिशूल पर टिकी है। यहाँ की हर सुबह 'सुबहे-बनारस' के रूप में अपनी दिव्यता बिखेरती है।
गंगा के घाटों पर होने वाली संध्या आरती और गलियों में गूँजते 'हर-हर महादेव' के स्वर यहाँ के अध्यात्म को साक्षात महसूस कराते हैं। काशी विश्वनाथ का भव्य प्रांगण आज आधुनिकता और परंपरा का अदभुत मिलन स्थल बन चुका है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, जो पूरे विश्व के भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है।
यहाँ होने वाली भव्य गंगा आरती विश्व प्रसिद्ध है, जहाँ आस्था की लौ हर हृदय में प्रज्वलित होती है।
हनुमान जी का विशेष मंदिर, जहाँ भक्त अपने सभी कष्टों और दुखों से मुक्ति पाने आते हैं।
भगवान शिव द्वारा काशी की स्थापना और सात जन्मों के पापों से मुक्ति देने वाली नगरी।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण और शहर का भव्य कायाकल्प, जो इसे विकास और विरासत का संगम बनाता है।
बाबा विश्वनाथ की नगरी में आध्यात्म को जिएं
दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती के दिव्य प्रकाश और मंत्रों में स्वयं को समर्पित करें।
काशी की गलियों और मणिकर्णिका घाट पर जीवन के अंतिम सत्य और मुक्ति का साक्षात्कार करें।
काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्णिम शिखर के दर्शन कर महादेव की असीम कृपा प्राप्त करें।
प्रातः काल की नौका विहार के साथ उगते सूरज की किरणों में गंगा की दिव्यता को महसूस करें।
बाबा विश्वनाथ के चरणों में अपनी हाजिरी लगाएं।
निस्वार्थ सेवा और समर्पण के साथ हर श्रद्धालु का स्वागत।
सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान का पवित्र संगम।
सरयू तट की पावन वायु और शांत आध्यात्मिक वातावरण।